निर्देशक: तुषार जलोटा
कलाकार: सिद्धार्थ मल्होत्रा, जान्हवी कपूर, संजय कपूर, मनजोत सिंह, इनायत वर्मा, रेनजी पनिकर, सिद्धार्थ शंकर
समय: 136 मिनट
आज की जनरेशन में जहाँ जब प्यार भी एक प्रोजेक्ट बन गया है, और रिश्ते "यूज़र इंटरफेस" से तय होने लगें, ऐसे में एक फिल्म आती है जो हमें याददिलाती है कि दिल को कनेक्शन चाहिए, नेटवर्क नहीं। 'परम सुंदरी' इसी डिजिटल दौर में दिल की बात करती है — हल्की-फुल्की हंसी के साथ, थोड़े तकरार, बहुत सारा प्यार, और ढेर सारा एहसास। यह फिल्म एक प्यारा सा रिमाइंडर है कि प्यार की असली मैजिक आज भी किसी ऐप से नहीं, आँखों से शुरू होता है।
कहानी एक स्मार्ट और कॉन्फिडेंट दिल्ली बेस्ड उद्यमी परम (सिद्धार्थ मल्होत्रा) की है, जो एक डेटिंग ऐप पर भरोसा करता है और मानता है कि प्यार कोकोड किया जा सकता है। जब उसके पिता (संजय कपूर) उसे उसकी बनाई हुई ऐप के ज़रिए सच्चा प्यार ढूंढने की चुनौती देते हैं, तब उसकी जिंदगी मेंआती है सुंदरी (जान्हवी कपूर), एक सधी-संवरी, दक्षिण भारतीय लड़की, जिसकी सादगी और गहराई किसी भी अल्गोरिद्म के बाहर है।
फिल्म एक आम ‘नॉर्थ मीट्स साउथ’ लव स्टोरी लग सकती है, लेकिन इसकी खूबी है इसकी ईमानदारी और आज के डिजिटल यूथ के असली संघर्षको दिखाना। सिद्धार्थ मल्होत्रा का आकर्षण और कॉमिक टाइमिंग असरदार है, लेकिन फिल्म की असली चमक है जान्हवी कपूर, जिनका किरदार इसफिल्म की जान है। वह अपने किरदार को नाटकीय बनाए बिना पूरी गरिमा और गहराई से निभाती हैं।
सहायक कलाकारों की बात करें तो संजय कपूर अपने चिर-परिचित अंदाज़ में मनोरंजन करते हैं। मनजोत सिंह और इनायत वर्मा जैसे कलाकार फिल्मको हल्का-फुल्का और रिलेटेबल बनाते हैं। रेनजी पनिकर और सिद्धार्थ शंकर भी कहानी में सच्चाई और संवेदनशीलता जोड़ते हैं।
तकनीकी रूप से, फिल्म की सिनेमैटोग्राफी शानदार है — दिल्ली की तेज़ रफ्तार दुनिया से लेकर केरल के शांत बैकवॉटर तक, यह एक विजुअल ट्रीटहै। कॉस्ट्यूम डिज़ाइन और प्रोडक्शन वैल्यू सलीकेदार है, जो किरदारों के साथ-साथ कहानी को भी मजबूती देता है।
फिल्म का संगीत इसका दिल है। ‘परदेसीया’, ‘भीगी साड़ी’, और ‘चाँद कागज़ का’ जैसे गाने न केवल रोमांस को रंग देते हैं, बल्कि हर सीन को इमोशन से भर देते हैं। ‘सुंदरी के प्यार में’ पहले ही प्लेलिस्ट का फेवरेट बन चुका है!
परम सुंदरी केवल एक रोम-कॉम नहीं, बल्कि एक सॉफ्ट रिबेल है उस डिजिटल कल्चर के खिलाफ जो प्यार को सिर्फ स्क्रॉल और टैप में बांध देता है।यह फिल्म हमें यह याद दिलाती है कि सच्चा प्यार तभी होता है जब दो लोग अपने डिजिटल अवतार नहीं, बल्कि असली खुद से मिलते हैं। अगर आपभी उस पुराने ज़माने की रोमांटिक फिल्मों को मिस करते हैं, तो ‘परम सुंदरी’ आपके लिए एक नया लेकिन दिल से पुराना तोहफा है — बिल्कुल उसी तरह का जिससे दिल सच में धड़क उठता है।