हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के साथ-साथ उनके प्रिय भक्तों, अनुयायियों और सखाओं के जन्मोत्सव भी बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। ऐसा ही एक पर्व है ललिता सप्तमी, जिसे राधाष्टमी से एक दिन पहले मनाया जाता है। यह दिन ललिता सखी के जन्म का प्रतीक माना जाता है, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की प्रिय सखी थीं। मान्यता है कि ललिता देवी ने श्रीराधा और श्रीकृष्ण के प्रेम को संजोने और संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी। इसलिए ललिता सप्तमी का दिन भक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
ललिता सप्तमी का धार्मिक महत्व
लिता देवी को "सखी मंडल" में सबसे प्रमुख स्थान प्राप्त है। वे श्रीराधा के साथ बाल्यकाल से जुड़ी हुई थीं और कृष्ण लीला में उनकी भागीदारी विशेष रूप से वर्णित है। ललिता सप्तमी के दिन भक्त उपवास रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और श्रीराधा-कृष्ण की सेवा में ललिता सखी की आराधना करते हैं। इससे न केवल प्रेम में संतुलन और समर्पण की भावना आती है, बल्कि जीवन में शुभता, शांति और रिश्तों में मधुरता भी बनी रहती है।
ललिता सप्तमी 2025 पंचांग (30 अगस्त 2025)
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तिथि:
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि, जो 30 अगस्त 2025 को रात 10:46 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी।
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करण:
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नक्षत्र:
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योग:
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दिशा शूल:
आज शनिवार के दिन पूर्व दिशा में यात्रा वर्जित मानी गई है। यात्रा करनी हो तो गुड़ खाकर निकलें।
सूर्य, चंद्र और ग्रह स्थिति
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सूर्य: सिंह राशि में स्थित हैं, साथ में केतु भी।
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चंद्रमा: तुला से वृश्चिक राशि की ओर गति कर रहे हैं।
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मंगल: कन्या राशि में।
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बुध: कर्क और सिंह राशि के बीच गोचर।
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शुक्र: कर्क राशि में ही बने रहेंगे।
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गुरु: मिथुन राशि में संचार कर रहे हैं।
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शनि: मीन राशि में स्थित हैं।
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राहु: कुंभ राशि में मौजूद हैं।
सूर्योदय-सूर्यास्त व चंद्रग्रहण की स्थिति
पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
इस दिन प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें। राधा-कृष्ण और ललिता सखी की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीप जलाएं, पुष्प अर्पित करें और ललिता अष्टकम् या राधा-कृष्ण स्तुति का पाठ करें। प्रेम भाव से आरती करें और मन में प्रेम व एकता की भावना का संकल्प लें।
निष्कर्ष:
ललिता सप्तमी प्रेम, समर्पण और सच्चे रिश्तों का उत्सव है। यह दिन याद दिलाता है कि जीवन में सच्ची मित्रता, सहयोग और निःस्वार्थ सेवा ही ईश्वर की भक्ति का मार्ग है। जो भक्त ललिता सखी का स्मरण श्रद्धा से करते हैं, उन पर राधा-कृष्ण की कृपा सदैव बनी रहती है।